
हरिद्वार के बैरागी कैंप मैदान में आयोजित उत्तराखंड सरकार के “जन-जन की सरकार, 4 साल बेमिसाल” कार्यक्रम के दूसरे दिन (8 मार्च 2026) आयुष विभाग का स्टॉल दर्शकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र बना रहा। बड़ी संख्या में पहुंचे आमजन, पर्यटकों तथा विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने स्टॉल का अवलोकन कर आयुष विभाग की सेवाओं और पहलों की सराहना की।

गौरतलब है कि 7 मार्च को कार्यक्रम में भारत सरकार के गृह मंत्री श्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के साथ प्रतिभाग कर विभिन्न विभागों के स्टॉल का अवलोकन किया था, जिसमें आयुष विभाग का स्टॉल भी शामिल रहा। प्रदर्शनी हाल में आयुष विभाग के स्टॉल का प्रतिनिधित्व डॉ. विजय कैलाश जोगदंडे (अपर सचिव आयुष एवं आयुष शिक्षा) तथा डॉ. आर.पी. सिंह (संयुक्त निदेशक) द्वारा किया गया।

डॉ. स्वास्तिक जैन, जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी, हरिद्वार ने जानकारी देते हुए बताया कि स्टॉल पर आयुष विभाग, उत्तराखंड द्वारा सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) गतिविधियों के माध्यम से विभाग की उपलब्धियों और सेवाओं को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया। साथ ही लोगों को आयुष सेवाओं का अधिकाधिक लाभ लेने के लिए प्रेरित किया गया।
स्टॉल की प्रमुख विशेषताएं
अस्पताल सेवाएं: आयुष चिकित्सालयों में उपलब्ध ओपीडी, आईपीडी एवं अन्य स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी।
पंचकर्म चिकित्सा: पंचकर्म की विभिन्न विधियों, उनके लाभ एवं उपलब्धता का प्रदर्शन।
आयुष शिक्षा: उत्तराखंड में आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी एवं सिद्ध चिकित्सा से संबंधित शिक्षण संस्थानों एवं पाठ्यक्रमों की जानकारी।
जनस्वास्थ्य पहल: आयुष विभाग द्वारा संचालित स्वास्थ्य संवर्धन योजनाओं और अभियानों के बारे में जागरूकता।
ई-संजीवनी सेवा: टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म के माध्यम से घर बैठे आयुष चिकित्सा परामर्श की सुविधा की जानकारी।
आयुष्मान आरोग्य मंदिर: राज्य में स्थापित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की जानकारी, जहां एक ही स्थान पर विभिन्न आयुष पद्धतियों की सेवाएं उपलब्ध हैं।
नए आयुष अस्पताल: राज्य में निर्माणाधीन आयुष अस्पतालों की प्रगति एवं भविष्य की योजनाओं से आमजन को अवगत कराया गया।
कार्यक्रम के दौरान स्टॉल पर लाइव योग प्रदर्शन भी आयोजित किया गया, जिसकी आम जनता ने खूब सराहना की। लोग स्वयं योग आसनों में भाग लेकर स्वास्थ्य लाभ का अनुभव करते दिखाई दिए। इसके साथ ही औषधीय पौधों का प्रदर्शन भी किया गया, जिसमें विभिन्न औषधीय पौधों की पहचान, गुण एवं उपयोग की जानकारी दी गई।
स्टॉल का एक विशेष आकर्षण “प्रकृति परीक्षण कियोस्क” रहा, जहां आगंतुकों ने अपना लाइव प्रकृति परीक्षण (प्रकृति निर्धारण) कराया। यह गतिविधि लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय रही।
इसके अतिरिक्त, विभाग द्वारा अनुसंधान आधारित आयुर्वेदिक पत्रिकाओं और अन्य प्रकाशनों का भी प्रदर्शन किया गया तथा कई इंटरैक्टिव डेमो एवं गतिविधियों के माध्यम से लोगों को आयुष पद्धतियों से जोड़ा गया।
डॉ. स्वास्तिक जैन ने बताया कि आयुष विभाग का उद्देश्य आयुष चिकित्सा पद्धतियों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है, ताकि समाज स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर निरोग जीवन जी सके। उन्होंने कहा कि विभाग का प्रयास है कि आयुष पद्धतियां हर घर तक पहुंचें और लोग स्वस्थ जीवन जी सकें।





