
हरिद्वार, 22 अक्टूबर। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देश पर परिवहन विभाग ने जनपद में नाबालिग छात्र-छात्राओं द्वारा दोपहिया वाहन चलाने पर रोक लगाने के लिए विद्यालयों के आसपास विशेष प्रवर्तन अभियान चलाया। अभियान के दौरान संदिग्ध वाहनों की जांच की गई और उनके पंजीकृत स्वामियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया।
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) नेहा झा के नेतृत्व में चलाए गए अभियान में एआरटीओ (प्रशासन) निखिल शर्मा और परिवहन कर अधिकारी वरुणा सैनी भी शामिल रहीं। टीम ने विभिन्न विद्यालयों के आसपास सड़कों, गलियों और पार्किंग स्थलों पर खड़े दोपहिया वाहनों की जांच की। ऐसे वाहनों को चिह्नित किया गया, जिनका उपयोग नाबालिग विद्यार्थियों द्वारा किए जाने की आशंका थी।
वाहन स्वामियों से मांगा जवाब
परिवहन विभाग ने संदिग्ध वाहनों के पंजीकृत स्वामियों को नोटिस जारी कर पूछा है कि वाहन विद्यालय के आसपास कौन लेकर आया था, चालक की आयु क्या थी और उसके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस था या नहीं। यदि वाहन किसी नाबालिग द्वारा चलाया गया, तो उसे वाहन किसने और किन परिस्थितियों में उपलब्ध कराया, इसकी जानकारी भी मांगी गई है।
वाहन स्वामियों को तीन दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण और संबंधित अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया कि जवाब और जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
विद्यालय प्रबंधन को भी निर्देश
अभियान के दौरान विद्यालय प्रबंधन को निर्देश दिए गए कि नाबालिग छात्र-छात्राओं के मोटरसाइकिल और स्कूटी जैसे वाहनों के लिए परिसर में पार्किंग सुविधा उपलब्ध न कराई जाए। बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन से विद्यालय आने वाले विद्यार्थियों की पहचान कर उनके अभिभावकों को सूचित किया जाए और दोबारा ऐसा होने से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
विद्यालयों को विद्यार्थियों और अभिभावकों को सड़क सुरक्षा नियमों, वाहन चलाने की न्यूनतम वैधानिक आयु और बिना लाइसेंस वाहन चलाने के कानूनी परिणामों के प्रति जागरूक करने के निर्देश भी दिए गए।
अभिभावकों पर भी हो सकती है कार्रवाई
परिवहन विभाग ने बताया कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत निर्धारित आयु और लाइसेंस संबंधी शर्तों का उल्लंघन कर वाहन चलाना दंडनीय है। अधिनियम की धारा 199ए के अंतर्गत किशोर द्वारा मोटर वाहन संबंधी अपराध किए जाने पर निर्धारित परिस्थितियों में वाहन स्वामी या अभिभावक के विरुद्ध भी कार्रवाई का प्रावधान है। इसमें तीन वर्ष तक के कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान बताया गया है।
एआरटीओ नेहा झा ने कहा कि जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुपालन में विद्यालयों के आसपास नियमित रूप से अभियान चलाया जाएगा। एआरटीओ निखिल शर्मा ने बताया कि अभियान का उद्देश्य कार्रवाई के साथ-साथ विद्यार्थियों, अभिभावकों और विद्यालय प्रबंधन में सड़क सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी विकसित करना भी है।
परिवहन विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे नाबालिग बच्चों को मोटरसाइकिल या स्कूटी चलाने के लिए न दें। विभाग के अनुसार, इससे बच्चों और सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।





